कमाण्ड क्षेत्र विकास कार्यक्रम
क्या आप मध्य प्रदेश की प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं और जल प्रबंधन कार्यक्रमों के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं? MPPSC और अन्य राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं (MP GK) की दृष्टि से यह विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है। कृषि प्रधान राज्य होने के नाते, मध्य प्रदेश में कृषि उत्पादकता बढ़ाने और जल संरक्षण के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।
इस लेख में हम राज्य में सिंचाई क्षमता का अधिकतम विकास करने के लिए चलाई जा रही प्रमुख योजनाओं पर विस्तृत चर्चा करेंगे। यहाँ आपको 1974 में शुरू हुए 'कमाण्ड क्षेत्र विकास कार्यक्रम' (Command Area Development Programme), वर्ष 2008 में गठित 'राजीव गांधी जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन मिशन', और "हर खेत को पानी" के लक्ष्य के साथ 2015 में शुरू की गई 'प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना' (PMKSY) की पूरी जानकारी मिलेगी। परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्यों को समझने के लिए इस लेख को अंत तक पढ़ें।
मध्य प्रदेश: प्रमुख जल प्रबंधन एवं सिंचाई कार्यक्रम
1974
कमाण्ड क्षेत्र विकास कार्यक्रम
2008
राजीव गांधी जलग्रहण मिशन
2015
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना
💧 कमाण्ड क्षेत्र विकास
- उद्देश्य: कृषि उत्पादकता में वृद्धि एवं अधिकतम सिंचाई क्षमता का विकास।
- वर्तमान स्थिति: 8 कमाण्ड क्षेत्र एवं 23 परियोजनाएँ सक्रिय (जैसे- कोलार, राजघाट, बाणसागर)।
- उपलब्धि (2022 तक): 7,19,371 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फील्ड चैनल का विकास।
🏢 राजीव गांधी मिशन
- गठन: वर्ष 2008।
- उद्देश्य: राज्य में सिंचाई परियोजनाओं का सुचारू क्रियान्वयन एवं विकास।
- प्रशासनिक नियंत्रण: पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, मध्य प्रदेश के अधीनस्थ।
🌾 PMKSY (2015)
- आदर्श वाक्य: "हर खेत को पानी"।
- उद्देश्य: वर्षा आधारित क्षेत्र में सुरक्षात्मक सिंचाई सुविधा एवं भूमि उत्पादकता बढ़ाना।
- क्रियान्वयन: 126 परियोजनाएँ (₹869.48 करोड़ लागत), 7.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र कवर।
कार्यक्रमों का तुलनात्मक अध्ययन (एक नज़र में)
| योजना / कार्यक्रम का नाम | प्रारंभ वर्ष | नोडल विभाग / संस्था | महत्वपूर्ण तथ्य / लक्ष्य |
|---|---|---|---|
| कमाण्ड क्षेत्र विकास कार्यक्रम | 9 सितम्बर, 1974 | जल प्रबंधन प्राधिकरण | 23 वृहद एवं मध्यम परियोजनाओं के अधीन 7.19 लाख हे. में फील्ड चैनल विकसित। |
| राजीव गांधी जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन मिशन | 2008 | पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग (म.प्र.) | सिंचाई परियोजनाओं के विकास एवं क्रियान्वयन हेतु विशेष गठन। |
| प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) | 1 जुलाई, 2015 | केंद्र व राज्य समर्थित | मृदा एवं जल संरक्षण, 126 परियोजनाओं के साथ "हर खेत को पानी" का लक्ष्य। |
- मध्य प्रदेश में बेहतर भूमि, जल प्रबंधन तथा वृहद एवं मध्यम सिंचाई परियोजनाओं के अधीन सिंचित क्षेत्रों में अधिकतम सिंचाई क्षमता का विकास एवं उपयोग कर, कृषि उत्पादकता में वृद्धि करने के उद्देश्य से 9 सितम्बर, 1974 में कमाण्ड क्षेत्र विकास कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है।
- वर्तमान में 8 कमांड क्षेत्र विकास एवं जल प्रबंधन क्षेत्र सक्रिय हैं। जिनके अन्तर्गत 23 परियोजनाएँ क्रमशः कोलार, कुँवर चैन सागर, रेहटी, सगड़, बघरू, संजय सागर, थावंर, पेंच, बिलगाँव, महुअर, सिंध, सिंहपुर, महान, कुछाल, हरसी, वेनगंगा, बाघ, रानी अवंतीबाई, लोधी सागर, राजघाट, बरियारपुर, बाणसागर, माही एवं गुरम नाला सम्मिलित हैं।
- मार्च, 2022 तक में कमाण्ड परियोजनाओं के अन्तर्गत कुल 10,37,765 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में से 7,19,371 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फील्ड चैनल को विकसित किया गया है।
राजीव गांधी जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन मिशन
मध्य प्रदेश में सिंचाई परियोजनाओं के क्रियान्वयन एवं विकास हेतु वर्ष 2008 में राजीव गांधी जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन मिशन का गठन किया गया, जो पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग मध्य प्रदेश के अधीनस्थ संस्था है।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY)
मृदा एवं जल संरक्षण व संवर्द्धन के माध्यम से वर्षा आधारित कृषि क्षेत्र में सुरक्षात्मक सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराकर कृषि भूमि की उत्पादकता में वृद्धि करने के उद्देश्य से 1 जुलाई, 2015 को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना प्रारंभ की गई। इस योजना के अन्तर्गत प्रदेश में 869.48 करोड़ रूपये की लागत से 7.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में 126 परियोजनाएँ क्रियान्वित की जा रही हैं। इस योजना का आदर्श वाक्य है- हर खेत को पानी।

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