मध्य प्रदेश के वनों का वर्गीकरण
यदि आप मध्य प्रदेश की प्रतियोगी परीक्षाओं (MPPSC, ESB/Vyapam) की तैयारी कर रहे हैं, तो 'मध्य प्रदेश के वनों का वर्गीकरण' एक बेहद महत्वपूर्ण विषय है। MPGK.org की इस पोस्ट में हम MP के वनों के प्रकारों को विस्तार से समझेंगे। मध्य प्रदेश भारत का सर्वाधिक वन क्षेत्र वाला राज्य है, जहाँ मुख्य रूप से उष्ण कटिबंधीय वन पाए जाते हैं।
अध्ययन की सुगमता के लिए मध्य प्रदेश के वनों को चार प्रमुख आधारों पर बांटा गया है: जलवायु के आधार पर (शुष्क, आर्द्र पर्णपाती और कँटीले वन), प्रादेशिक आधार पर, प्रजाति के आधार पर (साल, सागौन और मिश्रित वन), और प्रशासनिक व्यवस्था के आधार पर (आरक्षित, संरक्षित और अवर्गीकृत वन)। इस लेख में हम इन सभी वनों की विशेषताएँ, उनके भौगोलिक विस्तार और मुख्य वृक्षों की प्रजातियों पर विस्तार से चर्चा करेंगे ताकि आपकी परीक्षा की तैयारी और भी मजबूत हो सके।
मध्य प्रदेश के वनों का वर्गीकरण
मध्य प्रदेश के वन
(वर्गीकरण के 4 मुख्य आधार)
(वर्गीकरण के 4 मुख्य आधार)
⬇
1. जलवायु के आधार पर
2. प्रादेशिक आधार पर
3. प्रजाति के आधार पर
4. प्रशासनिक आधार पर
1. जलवायु के आधार पर (Climate Based)
| वन का प्रकार | औसत वर्षा | क्षेत्रफल (%) | प्रमुख वृक्ष | विस्तार (जिले) |
|---|---|---|---|---|
| उष्ण कटिबंधीय शुष्क पर्णपाती | 50 - 100 सेमी. | 88.65% | सागौन, शीशम, नीम, पीपल | सागर, जबलपुर, उज्जैन, खण्डवा, खरगौन |
| उष्ण कटिबंधीय आर्द्र पर्णपाती | 100 - 150 सेमी. | 8.97% | साल, बाँस, महुआ, बीजा, हर्रा | मण्डला, बालाघाट, सीधी, शहडोल, डिंडोरी आदि |
| उष्ण कटिबंधीय कँटीले वन | 25 - 75 सेमी. | 2.38% | बबूल, शीशम, हर्रा, पलाश | श्योपुर, शिवपुरी, भिंड, मुरैना, रतलाम आदि |
2. प्रादेशिक आधार पर (Regional Based)
विंध्य-कैमूर श्रेणी
विरल वन
- विशेषता: विरल वन के रूप में विस्तृत।
- प्रमुख जिले: दमोह तथा सागर।
सतपुड़ा-मैकाल श्रेणी
सर्वाधिक वन
- विशेषता: राज्य के सर्वाधिक वन क्षेत्र।
- प्रमुख जिले: सिवनी, छिंदवाड़ा एवं बालाघाट।
मुरैना-शिवपुरी पठार
कँटीले व झाड़ी युक्त
- विशेषता: सर्वाधिक कँटीले व झाड़ी युक्त वन।
- प्रमुख जिले: शिवपुरी, भिंड व मुरैना।
3. प्रजाति के आधार पर (Species Based)
साल वन
4.15% क्षेत्रफल
- प्रकार: आर्द्र पर्णपाती।
- विस्तार: पूर्वी भाग (मण्डला, बालाघाट, उमरिया, सीधी, डिण्डोरी, शहडोल)।
सागौन वन
19.36% क्षेत्रफल
- प्रकार: पर्णपाती वन।
- विस्तार: दक्षिणी भाग (होशंगाबाद, बैतूल, छिंदवाड़ा, दमोह, छतरपुर, पन्ना)।
मिश्रित वन
58.49% क्षेत्रफल
- प्रकार: मिश्रित पर्णपाती वन।
- विस्तार: बालाघाट, बैतूल, जबलपुर, सिवनी, मण्डला, सागर, भोपाल।
4. प्रशासनिक आधार पर (Administrative Based)
| वर्गीकरण | कुल क्षेत्रफल / % | नियंत्रण एवं नियम | विशेष तथ्य |
|---|---|---|---|
| आरक्षित वन (Reserved) | 61,886.49 वर्ग किमी (65.36%) |
प्रत्यक्ष पर्यवेक्षण। लकड़ी काटना और पशु चारण पूर्णतः वर्जित है। | सर्वाधिक: खण्डवा वन वृत्त न्यूनतम: छतरपुर वन वृत्त |
| संरक्षित वन (Protected) | 31,098 वर्ग किमी (32.84%) |
पूर्ण नियंत्रण, परन्तु स्थानीय लोगों को ईंधन व पशु चारण की अनुमति होती है। | - |
| अवर्गीकृत वन (Unclassified) | 1,705 वर्ग किमी (1.8%) |
वृक्षों को काटने व मवेशी चराने पर कोई प्रतिबंध नहीं। | - |
मध्य प्रदेश में प्रमुख रूप से उष्ण कटिबंधीय वन पाये जाते हैं, जिन्हें 4 आधारों पर वर्गीकृत किया जा सकता है-
जलवायु के आधार पर वनों का वर्गीकरण
मध्य प्रदेश की जलवायु के आधार पर यहाँ के वनों को 3 भागों में वर्गीकृत किया गया है-
| वनों का प्रकार | कुल वनावरण |
|---|---|
| • उष्ण कटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन | 88.65% |
| • उष्ण कटिबंधीय आर्द्र पर्णपाती वन | 8.97% |
| • उष्ण कटिबंधीय कँटीले वन | 2.38% |
(i) उष्ण कटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन
उष्ण कटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन राज्य के उन क्षेत्रों में पाये जाते हैं, जहाँ औसत वार्षिक वर्षा 50 से 100 सेमी. के मध्य होती है। ये वन मध्य प्रदेश के कुल वन क्षेत्र के 88.65 प्रतिशत भाग में विस्तृत हैं।
इन वनों का विस्तार सागर, जबलपुर, उज्जैन, खण्डवा तथा खरगौन में पाया जाता है, जिनमें मुख्यतः सागौन, शीशम, नीम, पीपल आदि के वृक्ष पाये जाते हैं।
(ii) उष्ण कटिबंधीय आर्द्र पर्णपाती वन
उष्ण कटिबंधीय आर्द्रपर्णपाती वन राज्य के उन क्षेत्रों में पाये जाते हैं, जहाँ औसत वर्षा 100 से 150 सेमी. के मध्य होती है। ये वन मध्य प्रदेश के कुल वन क्षेत्र के 8.97 प्रतिशत भाग में विस्तृत हैं।
इन वनों का विस्तार मण्डला, बालाघाट, सीधी, शहडोल, डिंडोरी, उमरिया तथा अनूपपुर में पाया जाता है, जिसमें मुख्यतः साल, बाँस, महुआ, बीजा, हर्रा आदि वृक्ष पाये जाते हैं।
(iii) उष्ण कटिबंधीय कँटीले वन
उष्ण कटिबंधीय कँटीले वन राज्य के उन क्षेत्रों में पाये जाते हैं, जहाँ औसत वर्षा 25 से 75 सेमी. के मध्य होती है। ये वन मध्य प्रदेश के कुल वन क्षेत्र के 2.38 प्रतिशत भाग में विस्तृत हैं।
इन वनों का विस्तार श्योपुर, शिवपुरी, भिंड, मुरैना, रतलाम, मंदसौर, टीकमगढ़ व दतिया में पाया जाता है, जिसमें मुख्यतः बबूल, शीशम, हर्रा, पलाश आदि के वृक्ष पाये जाते हैं।
प्रादेशिक आधार पर वनों का वर्गीकरण
(i) विंध्य-कैमूर श्रेणी
ये वन क्षेत्र विंध्य-कैमूर श्रेणी में विरल वन के रूप में विस्तृत है, जो दमोह तथा सागर जिलों में पाये जाते हैं।
(ii) सतपुड़ा-मैकाल श्रेणी
इस वन क्षेत्र में सर्वाधिक वन पाये जाते हैं। इन वनों का विस्तार सतपुड़ा-मैकाल श्रेणी के अन्तर्गत सिवनी, छिंदवाड़ा एवं बालाघाट जिलों में है।
(iii) मुरैना-शिवपुरी पठार श्रेणी
इस वन क्षेत्र में सर्वाधिक कँटीले व झाड़ी युक्त वन पाये जाते हैं। इन वनों का विस्तार शिवपुरी, भिंड व मुरैना जिलों में है।
प्रजाति के आधार पर वनों का वर्गीकरण
(i) साल वन
ये उष्ण कटिबंधीय आर्द्र पर्णपाती वन के वृक्ष हैं, जो मध्य प्रदेश के पूर्वी भाग मण्डला, बालाघाट, उमरिया, सीधी, डिण्डोरी तथा शहडोल जिलों में पाए जाते हैं। राज्य के कुल वन क्षेत्र के 4.15 प्रतिशत भाग पर साल वनों का विस्तार है।
(ii) सागौन वन
ये उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वन के वृक्ष हैं, जो मध्य प्रदेश के दक्षिणी भागों के होशंगाबाद, बैतूल, छिंदवाड़ा, दमोह, छतरपुर तथा पन्ना जिलों में पाये जाते हैं। राज्य के कुल वन क्षेत्र के 19.36 प्रतिशत भाग पर सागौन वनों का विस्तार है।
(iii) मिश्रित वन
ये उष्ण कटिबंधीय मिश्रित पर्णपाती वन हैं, जो मध्य प्रदेश के मुख्यतः बालाघाट, बैतूल, जबलपुर, सिवनी, मण्डला, सागर तथा भोपाल जिलों में पाये जाते हैं। राज्य के कुल वन क्षेत्र के 58.49 प्रतिशत भाग पर मिश्रित वनों का विस्तार है।
| मध्य प्रदेश में वनों के प्रकार और क्षेत्रफल | ||
|---|---|---|
| संरचना | क्षेत्रफल (वर्ग किमी.) | प्रतिशत |
| सागौन | 18,332 | 19.36 |
| साल | 3,932 | 4.15 |
| मिश्रित एवं अन्य | 55436 | 58.49 |
| रिक्त (खुला क्षेत्र) | 16989 | 18.00 |
| कुल योग | 94,689 | 100.00 |
प्रशासनिक आधार पर वनों का वर्गीकरण
1. आरक्षित वन
ये वन राज्य सरकार के प्रत्यक्ष पर्यवेक्षण में रहते हैं। इन वनों में लकड़ियों के एकत्रण तथा मवेशियों को चराने के लिए लोगों का प्रवेश वर्जित है। राज्य में 61,886.49 वर्ग किमी. क्षेत्र पर आरक्षित वन पाये जाते हैं, जो राज्य के कुल वन क्षेत्र का 65.36 प्रतिशत है।
मध्य प्रदेश में सर्वाधिक आरक्षित वन क्षेत्र खण्डवा वन वृत्त तथा न्यूनतम छतरपुर वन वृत्त में पाये जाते हैं।
2. संरक्षित वन
ये वन राज्य सरकार के पूर्णतः नियंत्रण में रहते हैं परन्तु स्थानीय लोगों को ईंधन के लिए लकड़ी एकत्र करने तथा मवेशियों को चराने की अनुमति होती है। राज्य में 31,098 वर्ग किमी. क्षेत्र पर संरक्षित वन पाये जाते हैं, जो राज्य के कुल वन क्षेत्र का 32.84 प्रतिशत है।
3. अवर्गीकृत वन
अवर्गीकृत वन क्षेत्र में वृक्षों को काटने तथा मवेशियों को चराने पर कोई प्रतिबंध नहीं होता है। राज्य में 1,705 वर्ग किमी. क्षेत्र पर अवर्गीकृत वन पाये जाते हैं, जो राज्य के कुल वन क्षेत्र का 1.8 प्रतिशत है।
| प्रदेश के वन क्षेत्रों की वैधानिक स्थिति | ||
|---|---|---|
| वर्गीकरण | क्षेत्रफल | प्रतिशत |
| आरक्षित वन | 61,886 | 65.36 |
| संरक्षित वन | 31,098 | 32.84 |
| अवर्गीकृत वन | 1,705 | 1.80 |
| योग | 94,689 | 100.00 |


Comments
Post a Comment