मध्य प्रदेश की प्रमुख बहुउद्देशीय परियोजनाएँ
क्या आप मध्य प्रदेश की प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे MPPSC, Vyapam, Patwari) की तैयारी कर रहे हैं? अगर हाँ, तो "मध्य प्रदेश की प्रमुख बहुउद्देशीय परियोजनाएँ" आपके लिए एक बेहद महत्वपूर्ण विषय है। इस लेख में हम मध्य प्रदेश की नदियों पर निर्मित विभिन्न नदी घाटी परियोजनाओं, बाँधों और उनसे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों को विस्तार से कवर करेंगे।
यहाँ आपको चम्बल घाटी परियोजना (गाँधी सागर, राणा प्रताप सागर), नर्मदा घाटी परियोजना (सरदार सरोवर, इन्दिरा सागर), बाण सागर परियोजना, और प्रदेश की अति-महत्वपूर्ण 'नदी जोड़ो परियोजनाओं' (जैसे केन-बेतवा लिंक) के बारे में सटीक जानकारी मिलेगी। इन बहुउद्देशीय परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य सिंचाई, जल विद्युत उत्पादन और पेयजल उपलब्ध कराना है, जो प्रदेश के विकास की जीवन रेखा हैं। आइए, mpgk.org की इस विशेष पोस्ट में मध्य प्रदेश के भूगोल के इस अहम टॉपिक को गहराई से समझें और अपनी परीक्षा की तैयारी को और मजबूत करें।
मध्य प्रदेश की प्रमुख बहुउद्देशीय परियोजनाएँ
सिंचाई, जल विद्युत एवं पेयजल की जीवन रेखाएँ
चम्बल घाटी परियोजना (3 चरण)
मध्य प्रदेश व राजस्थान की संयुक्त परियोजना (कुल 386 MW)
⚡ 115 MW
गाँधी सागर बाँध
📍 भानपुरा, मंदसौर (MP)
🗓️ 1960 निर्मित
💧 चम्बल का प्रथम व सबसे बड़ा बाँध
➔
⚡ 172 MW
राणा प्रताप सागर
📍 रावतभाटा, चित्तौड़गढ़ (RJ)
🗓️ 1964 निर्मित
💧 1100 मी. लम्बाई
➔
⚡ 99 MW
जवाहर सागर बाँध
📍 बोरावास, कोटा (RJ)
🗓️ 1971 निर्मित
💧 राणा प्रताप सागर से 33 किमी दूर
नर्मदा घाटी परियोजना
भारत की 5वीं सबसे बड़ी घाटी परियोजना (MP, GJ, MH, RJ संयुक्त)
इन्दिरा सागर (पुनासा)
- स्थान: खण्डवा (MP)
- क्षमता: ⚡ 1000 MW
- सिंचाई: 27 लाख हेक्टेयर
- शुरुआत: 1983 (श्रीमती इन्दिरा गांधी)
सरदार सरोवर
- स्थान: गुजरात (MP को 57% बिजली)
- क्षमता: ⚡ 1450 MW
- विशेषता: भारत का दूसरा सबसे ऊँचा (138.6m)
- सिंचाई: 18.45 लाख हेक्टेयर
ओंकारेश्वर परियोजना
- स्थान: मंधाता, खण्डवा
- क्षमता: ⚡ 520 MW
- लाभान्वित: खण्डवा, खरगौन, धार
रानी अवन्ती बाई (बरगी)
- स्थान: बिजौरा ग्राम, जबलपुर
- नदी: नर्मदा व बरगी
- क्षमता: ⚡ 90 MW (2.5 लाख हे. सिंचाई)
प्रमुख अन्तर्राज्यीय संयुक्त परियोजनाएँ
🤝 MP + UP संयुक्त
- माताटीला बाँध: बेतवा नदी (ललितपुर)
- राजघाट बाँध: बेतवा नदी (15 MW)
- उर्मिल परियोजना: उर्मिल नदी (60:40 जल बँटवारा)
🤝 MP + महाराष्ट्र संयुक्त
- पेंच परियोजना: पेंच नदी, माचागोरा (160 MW)
- राजीव सागर (बावनथड़ी): कुड़वा ग्राम, बालाघाट
- बाघ व काली सागर: सिंचाई सुविधा (बड़वानी/बैतूल)
बाण सागर परियोजना (सोन नदी) - नहर प्रणाली
(MP, UP, Bihar का 2:1:1 अनुपात | क्षमता: 405 MW | देवलोंद, शहडोल)
| नहर का नाम | लम्बाई (किमी) | सिंचित क्षेत्र (हेक्टेयर) |
|---|---|---|
| सिंहावल नहर | 76 | 21,714 |
| पुरवा नहर | 129 | 59,267 |
| क्योटी नहर | 90 | 36,422 |
| दायीं (मुख्य नहर) | 30 | 4,047 |
| त्यौंथर उद्वहन नहर | 41 | 11,330 |
| गुड़ मऊगंज नहर | 65 | 19,723 |
| कुल योग | 442 किमी | 1,54,667 हेक्टेयर |
नदी जोड़ो परियोजना (River Interlinking)
नर्मदा-क्षिप्रा लिंक
- शुरुआत: 29 नवम्बर, 2012
- विशेषता: मध्य प्रदेश की प्रथम नदी जोड़ो परियोजना
- कार्य: ओंकारेश्वर से पानी क्षिप्रा में छोड़ना
- लाभ: मालवा (देवास, उज्जैन, शाजापुर, इंदौर) का 16 लाख एकड़ क्षेत्र।
केन-बेतवा लिंक (अमृत क्रान्ति)
- शुरुआत: 2005 (22 मार्च 2021 को समझौता)
- विशेषता: MP व UP की ऐतिहासिक संयुक्त पहल
- निर्माण: दौधन बाँध (73m) व 231 किमी. नहर
- लाभ: 8.81 लाख हे. सिंचाई + 72 MW विद्युत।
परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य
संजय सरोवर (ऊपरी वेनगंगा): बालाघाट स्थित भीमगढ़ बाँध, जो एशिया का सबसे बड़ा और विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मिट्टी का बाँध है।
चोरल परियोजना: इन्दौर जिले में 1979 में निर्मित यह मध्य प्रदेश की 'प्रथम अन्तर्घाटी परियोजना' है।
नर्मदा जल विवाद (NWDT): 1979 के निर्णय अनुसार MP को सर्वाधिक 18.25 मिलियन एकड़ फुट (MAF) जल आवंटित किया गया है।
मोहनपुरा सिंचाई परियोजना: राजगढ़ (नेवज नदी) पर निर्मित। 23 जून 2018 को पीएम मोदी द्वारा लोकार्पित।
चम्बल घाटी परियोजना (Chambal Velley Project)
चम्बल घाटी परियोजना की शुरुआत वर्ष 1953-54 में की गयी थी। यह मध्य प्रदेश और राजस्थान की संयुक्त परियोजना है, जिससे 386 मेगावाट विद्युत उत्पादन और मध्य प्रदेश एवं राजस्थान के लिए सिंचाई एवं पेयजल सुविधा उपलब्ध होती है।
चम्बल घाटी परियोजना तीन चरणों में पूर्ण हुई, जिसके अन्तर्गत मध्य प्रदेश में गांधी सागर बाँध तथा राजस्थान में राणा प्रताप सागर बाँध, जवाहर सागर बाँध तथा कोटा बैराज बाँध बनाए गए हैं।
चम्बल घाटी परियोजना
- गाँधी सागर बाँध (115 mw)
- राणा प्रताप सागर बाँध (175 mw)
- जवाहर सागर बाँध (99 mw)
गांधी सागर बाँध (Gandhi Sagar Dam)
यह वर्ष 1960 में मन्दसौर के भानपुरा तहसील में बनाया गया जिसका शिलान्यास 7 मार्च, 1954 को प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू द्वारा किया गया था। यह बाँध 513.60 मीटर लम्बा तथा 62 मीटर ऊँचा है।
इस बाँध से मंदसौर, रतलाम एवं नीमच जिलों की लगभग 11 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जाती है। गाँधी सागर बाँध चम्बल नदी का प्रथम और सबसे बड़ा बाँध है। इस बाँध से 115 मेगावाट विद्युत उत्पादन होता है।
राणा प्रताप सागर बाँध (Rana Pratap Sagar Dam)
यह वर्ष 1964 में चित्तौड़गढ़ के रावतभाटा में निर्मित किया गया था। इससे 172 मेगावॉट बिजली का उत्पादन होता है। यह मध्य प्रदेश व राजस्थान की संयुक्त परियोजना है। इस बाँध की ऊँचाई 54 मी. तथा लम्बाई 1100 मी. है।
जवाहर सागर बाँध (Jawahar Sagar Dam)
जवाहर सागर बाँध वर्ष 1971 में राणा प्रताप सागर बाँध से 33 किमी. दूर कोटा (राजस्थान) में बोरावास के समीप निर्मित किया गया था। यह बाँध 45 मी. ऊँचा तथा 440 मी. लम्बा है। इसकी कुल विद्युत उत्पादन क्षमता 99 मेगावॉट है।
कोटा बैराज बाँध (Kota Barrage Dam)
यह राजस्थान के कोटा में स्थित एक अवरोधक बाँध है। इसका निर्माण कार्य वर्ष 1953 में प्रारम्भ हुआ तथा वर्ष 1960 में पूर्ण हुआ। इस बाँध के पास कोटा ताप विद्युत गृह भी स्थापित है। इससे सिंचाई के लिए दो नहरें निर्मित की गयी हैं, जिनसे मध्य प्रदेश व राजस्थान में सिंचाई होती है।
बायीं ओर की नहर 124 किमी. राजस्थान में तथा 248 किमी. मध्य प्रदेश में है। इससे दोनों राज्यों की सिंचाई होती है। दायीं नहर से पूर्वी जिले लाभांवित होते हैं, जबकि बाँयीं नहर से राजस्थान में सिंचाई होती है जिसकी कुल लंबाई 178 किमी. है।
नर्मदा घाटी परियोजना (Narmada Valley Project)
नर्मदा नदी पर क्रियान्वित नर्मदा घाटी परियोजना भारत की पाँचवी सबसे बड़ी नदी घाटी परियोजना है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य, सिंचाई एवं विद्युत उत्पादन करना है। यह मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र एवं राजस्थान की संयुक्त परियोजना है। इस परियोजना के अन्तर्गत 29 वृहद, 135 मध्यम एवं 3000 लघु सिंचाई परियोजनाएँ प्रस्तावित हैं। इन परियोजनाओं से 27.55 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। 1 अगस्त, 2000 को नर्मदा हाइड्रोइलेक्ट्रिक डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन की स्थापना कर इस परियोजना से जल विद्युत उत्पादन करने के लिए प्रभावी योजनाएँ क्रियान्वित की जा रही हैं।
नर्मदा जल विवाद
मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र एवं राजस्थान के मध्य नर्मदा जल विवाद को सुलझाने के लिए वी. रामास्वामी तथा डॉ. अंसारी की अध्यक्षता में 6 अक्टूबर, 1996 को नर्मदा जल विवाद अभिकरण (NWDT) का गठन किया गया। 12 दिसंबर, 1979 को चारों राज्यों के लिए सहभाजन आश्रिता पर आधारित जल वितरण किया गया, जिसमें 28 मिलियन एकड़ फुट जल क्रमशः गुजरात (9.0), मध्य प्रदेश (18.25), महाराष्ट्र (0.25) तथा राजस्थान (0.50) को प्रदान किया जाता है।
नर्मदा बचाओ आन्दोलन
यह आन्दोलन नर्मदा नदी पर निर्मित किए जा रहे बाँधों एवं उनके निर्माण स्थल से लोगों के विस्थापन को रोकने के लिए वर्ष 1985 में प्रारम्भ किया गया था। 4 सितंबर, 1989 में हरसूद (खण्डवा) में 200 से अधिक गैर सरकारी संगठनों के लगभग 50 हजार लोगों की सहभागिता ने इस आन्दोलन का राष्ट्रीय विस्तार किया। नर्मदा संरक्षण के मूल उद्देश्य से प्रेरित इस जन आंदोलन को समाज सेविका मेधा पाटकर ने नेतृत्व प्रदान किया तथा अरुण पटेल, अरुन्धती रॉय, बाबा आम्टे, शबाना आजमी, सुन्दरलाल बहुगुणा आदि ने आन्दोलन के विकास एवं विस्तार में सक्रिय योगदान दिया।
इन्दिरा सागर परियोजना (Indira Sagar Project)
इन्दिरा सागर परियोजना नर्मदा नदी पर निर्मित एक बहुउद्देशीय परियोजना है, जो मध्य प्रदेश के खण्डवा जिले के पुनासा ग्राम में स्थित है। इस परियोजना की आधारशिला श्रीमती इन्दिरा गांधी द्वारा 23 अक्टूबर, 1983 को रखी गयी थी।
इस बाँध के द्वारा 27 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई तथा वर्ष 2004 से 1000 मेगावॉट विद्युत उत्पादन किया जा रहा है।
सरदार सरोवर परियोजना (Sardar Sarovar Project)
सरदार सरोवर बाँध परियोजना की आधारशिला 5 अप्रैल, 1961 को पं. जवाहरलाल नेहरू द्वारा रखी गई थी। 17 सितंबर, 2017 को इस बाँध का निर्माण कार्य पूरा हुआ। यह भारत का दूसरा सबसे ऊँचा (138.6 मीटर) बाँध है।
इस परियोजना से 1450 मेगावॉट विद्युत उत्पादन होगा, जिसमें 57% मध्य प्रदेश, 27% महाराष्ट्र और 16% गुजरात को प्राप्त होगा तथा 18.45 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी।
महेश्वर बाँध (Maheshwar Dam)
महेश्वर बाँध, मध्य प्रदेश के खरगौन जिले के महेश्वर कस्बे में नर्मदा नदी पर स्थित है, इससे 400 मेगावॉट विद्युत उत्पादन किया जाता है।
ओंकारेश्वर परियोजना (Omkareshwar Project)
ओंकारेश्वर परियोजना एक बहुउद्देशीय परियोजना है, जो मध्य प्रदेश के खण्डवा जिले के मंधाता ग्राम में स्थित है। इस परियोजना से प्रदेश के खण्डवा, खरगौन एवं धार जिले लाभांवित होते हैं।
इसकी कुल अनुमानित विद्युत क्षमता 520 मेगावॉट है। इस बाँध की कुल लम्बाई 949 मीटर और अधिकतम ऊँचाई 73 मीटर है। इस परियोजना के अन्तर्गत 2,83,324 हेक्टेयर क्षेत्र पर सिंचाई की जाती है।
रानी अवन्ती बाई सागर या बरगी परियोजना
यह परियोजना मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में बिजौरा ग्राम में बरगी और नर्मदा नदी पर निर्मित (वर्ष 1988-90) एक बहुउद्देशीय बाँध है। इसकी कुल जल विद्युत उत्पादक क्षमता 90 मेगावॉट है। इस परियोजना से जबलपुर, मंडला एवं सिवनी जिलों की लगभग 2.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र की सिंचाई की जाती है।
बरगी अपवर्तन परियोजना (Bargi Diversion Project)
बरगी अपवर्तन परियोजना बरगी नदी पर बनायी गई है। इस परियोजना से मध्य प्रदेश के चार जिलों जबलपुर, कटनी, रीवा और सतना में 2.45 लाख हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित होगा।
थाँवर परियोजना (Thanwar Project)
थाँवर परियोजना मण्डला जिले के झुलझुलपुर नामक स्थान के समीप बाँध बनाकर स्थापित की गई है। इस परियोजना द्वारा 1,812 हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित किया जाता है।
बारना परियोजना (Barna Project)
बारना सिंचाई परियोजना, विश्व बैंक की सहायता से रायसेन जिले में बारना नदी पर निर्मित एक वृहद परियोजना है। इस परियोजना से रायसेन जिले का 48,805 हेक्टेयर एवं सीहोर जिले का 11,695 हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित करने का लक्ष्य है।
कोलार परियोजना (Kolar Project)
कोलार परियोजना सीहोर जिले में नर्मदा की सहायक कोलार नदी पर विश्व बैंक की सहायता से निर्मित की गई है। इससे सीहोर जिले की 7,800 हेक्टेयर भूमि सिंचित होती है।
सुक्ता परियोजना (Sukta Project)
यह बाँध खंडवा और बुरहानपुर की सीमा पर नर्मदा की सहायक सुक्ता नदी पर बनाया गया है। इसमें खंडवा जिले के 18,583 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचित किये जाने का लक्ष्य रखा गया है। इसे भगवन्त सागर परियोजना के नाम से भी जाना जाता है।
चोरल परियोजना (Choral Project)
यह इन्दौर जिले में चोरल नदी पर वर्ष 1979 में निर्मित मध्य प्रदेश की प्रथम अन्तर्घाटी परियोजना है। इसके माध्यम से महू (इन्दौर) के लगभग 5000 हेक्टेयर क्षेत्र की सिंचाई की जाती है।
जोबट/चन्द्रशेखर आजाद परियोजना
(Jobat/ Chandra Shekhar Azad Project)
वर्ष 1985 में अलीराजपुर जिले के जोबट में हथिनी नदी पर यह परियोजना स्थापित की गई है। इस परियोजना से प्रदेश के धार एवं अलीराजपुर जिले की 9,848 हेक्टेयर भूमि सिंचित करने का लक्ष्य रखा गया है।
मान परियोजना (Man Project)
यह परियोजना नर्मदा की सहायक मान नदी पर धार जिले में स्थित है। इस परियोजना के अन्तर्गत धार व झाबुआ जिले के 15000 हेक्टेयर भू-भाग को सिंचित किया जाएगा।
तवा बाँध परियोजना (Tawa Dam Project)
होशंगाबाद जिले की इटारसी तहसील के समीप नर्मदा की सहायक तवा नदी पर यह परियोजना वर्ष 1960 में प्रारंभ की गई, जिससे होशंगाबाद, सीहोर तथा हरदा जिलों का 3.33 लाख हेक्टेयर भू-भाग (2.47 लाख हेक्टेयर वर्तमान क्षमता) सिंचित किया जाएगा।
इस बाँध के दायें तट पर 125 मेगावॉट की 8 यूनिटें स्थापित कर 1,000 मेगावॉट विद्युत उत्पादन किया जा रहा है।
बावनथड़ी या राजीव सागर परियोजना (Bawanthadi or Rajiv Sagar Project)
- बावनथड़ी नदी पर निर्मित राजीव सागर परियोजना मध्य प्रदेश व महाराष्ट्र राज्य की संयुक्त वृहद् परियोजना है। यह परियोजना मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले की कटंगी तहसील के कुड़वा एवं महाराष्ट्र के भंडारा जिले की तुमसर तहसील के पास निर्मित की गई है।
- इस परियोजना की आधारशिला वर्ष 1975 में रखी गई थी तथा इसका निर्माण कार्य वर्ष 2012 में पूर्ण हुआ। इस बाँध का क्षेत्रफल 1,365 वर्ग किमी. तथा जल संग्रहण क्षमता 280.24 मिलियन घन मी. है।
- इस परियोजना के अन्तर्गत बालाघाट के 29412 हेक्टेयर तथा महाराष्ट्र (भंडारा जिले) के 27,788 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में सिंचाई होती है।
- राजीव सागर बाँध बालाघाट जिले की कटंगी तहसील के कुड़वा ग्राम में निर्मित किया गया है। इसलिए स्थानीय लोग इसे कुड़वा बाँध भी कहते हैं।
बाण सागर परियोजना (Ban Sagar Project)
- मध्य प्रदेश के शहडोल (देवलोंद) जिले में सोन नदी पर बाण सागर परियोजना स्थापित है। यह मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश तथा बिहार की संयुक्त परियोजना है, जिसका निर्माण कार्य वर्ष 1978 में प्रारम्भ हुआ तथा वर्ष 2006 में पूर्ण हुआ।
- इस बाँध के जल एवं इसके निर्माण की लागत का बँटवारा मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश तथा बिहार में 2:1:1 के अनुपात में किया गया है। इसके अन्तर्गत मध्य प्रदेश में 2,490 वर्ग किमी., उत्तर प्रदेश में 1500 वर्ग किमी. तथा बिहार में 940 वर्ग किमी. क्षेत्रफल पर सिंचाई की जाती है। इस परियोजना से प्रदेश के शहडोल, सीधी, सतना, रीवा व कटनी जिले सिंचाई सुविधा से लाभान्वित होगें।
| बाण सागर बाँध की नहर प्रणाली | ||
|---|---|---|
| नहर | लम्बाई | सिंचित क्षेत्र |
| • सिंहावल नहर | 76 किमी. | 21714 हेक्टेयर |
| • पुरवा नहर | 129 किमी. | 59267 हेक्टेयर |
| • क्योटी नहर | 90 किमी. | 36422 हेक्टेयर |
| • दायीं (मुख्य नहर) | 30 किमी. | 4047 हेक्टेयर |
| • भितरी नहर | 11 किमी. | 2184 हेक्टेयर |
| • त्यौंथर उद्वहन नहर | 41 किमी. | 11330 हेक्टेयर |
| • गुड़ मऊगंज नहर | 65 किमी. | 19723 हेक्टेयर |
| कुल | 442 किमी. | 154667 हेक्टेयर |
बाण सागर बाँध के उपबाँध
- अन्बार बाँध
- बकेली बाँध
- भितरी बाँध
- कदबारी बाँध
- झिन्ना बाँध
बाण सागर परियोजना के अन्तर्गत विभिन्न क्षमता वाली 10 विद्युत इकाइयाँ स्थापित की गई हैं, जिनकी कुल उत्पादन क्षमता 405 मेगावॉट है।
मटियारी परियोजना (Matiyari Project)
मटियारी परियोजना, बंजर की सहायक मटियारी नदी पर वर्ष 1979 में निर्मित एक वृहद् परियोजना है, जो मध्य प्रदेश के मण्डला जिले के सिमरिया गाँव में स्थित है। यह परियोजना वर्ष 2001 में पूरी हो गयी है। इससे पेयजल और सिंचाई की सुविधा मण्डला और डिंडोरी को प्राप्त होती है।
पेंच परियोजना (Pench Project)
यह मध्य प्रदेश तथा महाराष्ट्र की संयुक्त वृहद परियोजना है जो मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा के माचागोरा में पेंच नदी पर स्थित है। इसके अन्तर्गत 160 मेगावॉट बिजली का उत्पादन होता है। इस परियोजना से छिंदवाड़ा, सिवनी तथा बालाघाट जिले लाभान्वित होंगे।
ऊपरी वेनगंगा या संजय सरोवर परियोजना
यह मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की संयुक्त वृहद परियोजना है। वर्ष 1970 में बालाघाट जिले में संजय सरोवर बाँध (भीमगढ़) निर्मित किया गया है। यह एशिया का सबसे बड़ा तथा विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मिट्टी का बाँध है।
माताटीला बाँध (Matatila Dam)
यह मध्य प्रदेश तथा उत्तर प्रदेश की संयुक्त वृहद परियोजना है जो उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले में बेतवा नदी पर स्थापित है। इस बाँध पर वर्ष 1956 में जल विद्युत गृह का निर्माण किया गया। इस पर 10.2 मेगावॉट की तीन इकाइयाँ स्थापित की गई हैं।
माताटीला बाँध से 163.60 लाख घन मी. पेयजल उपलब्ध होता है। इस परियोजना से झाँसी, जालौन, हमीरपुर एवं ग्वालियर जिले लाभान्वित होते हैं।
राजघाट बाँध (Rajghat Dam)
- यह बेतवा नदी पर ललितपुर से 22 किमी. की दूरी पर निर्मित है। यह बाँध 600 मी. लम्बा तथा 73.5 मीटर ऊँचा है। इसका जलग्रहण क्षेत्र लगभग 17000 वर्ग किमी. है। इस बाँध पर 15 मेगावॉट के तीन टर्बाइन बिजली उत्पादन के लिए स्थापित किए गये हैं। यह बाँध मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश की संयुक्त परियोजना है।
- इस परियोजना से उत्तर प्रदेश का 1,09,052 हेक्टेयर भू-भाग सिंचित होगा, जिसके अन्तर्गत ललितपुर, झाँसी, जालौन तथा हमीरपुर जिले सम्मिलित हैं, जबकि मध्य प्रदेश का 1,16,592 हेक्टेयर भू-भाग सिंचित होगा। जिससे गुना, शिवपुरी, दतिया, टीकमगढ़, ग्वालियर तथा भिंड जिले लाभान्वित होगें।
भाण्डेर परियोजना (Bhander Project)
यह परियोजना बेतवा नदी पर मध्य प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 1953 में प्रारम्भ की गयी। इससे लाभान्वित जिले ग्वालियर, भिण्ड, दतिया तथा ग्वालियर हैं।
बेतवा व उसकी सहायक नदियों पर निर्मित अन्य बाँध
- नीमखेड़ा बाँध - रायसेन
- मकोडिया बाँध - विदिशा
- बरारी बाँध - रायसेन
- बर्घल बाँध - विदिशा
उर्मिल परियोजना (Urmil Project)
वर्ष 1978 में प्रारम्भ, यह परियोजना मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की संयुक्त परियोजना है। यह बाँध छतरपुर जिले के हिरोंटा गाँव में उर्मिल नदी पर स्थित है। इस परियोजना में मध्य प्रदेश तथा उत्तर प्रदेश में 60:40 के अनुपात में जल का बँटवारा किया गया है। इस परियोजना में 50 मेगावॉट विद्युत उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इससे मध्य प्रदेश के लाभान्वित होने वाले जिले छतरपुर एवं टीकमगढ़ हैं।
नरगवाँ परियोजना (Nargava Project)
यह केन की सहायक नदी है। छतरपुर जिलें में मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के द्वारा संयुक्त परियोजना विकसित की जा रही है जिससे छतरपुर जिले का 16,190 हेक्टेयर भू भाग सिंचित किये जाने का लक्ष्य रखा गया है।
माही परियोजना (Mahi Project)
वर्ष 1985 में प्रारंभ यह परियोजना माही नदी पर धार व झाबुआ जिलों में स्थित है। इसके द्वारा झाबुआ जिले में 18,517 हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित होता है। वर्ष 2017-18 में माही-नर्मदा लिंक परियोजना को मंजूरी प्रदान की गई है।
सिंध या मोहिनी सागर परियोजना
वर्ष 1972-73 में प्रारम्भ यह प्रदेश के शिवपुरी जिले के मोहिनी खेड़ी ग्राम के निकट सिंध नदी पर बनाया गया है। इस परियोजना के माध्यम से शिवपुरी व ग्वालियर जिले की 35,200 हेक्टेयर भूमि को सिंचित किये जाने का लक्ष्य रखा गया है। यह परियोजना वर्ष 2008-09 में पूरी हो गयी है।
टोंस परियोजना (Tons Project)
यह सतना जिले में टोंस नदी पर 320 मेगावॉट की जल विद्युत परियोजना है।
बाघ परियोजना (Bagh Project)
यह महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की संयुक्त परियोजना है, जो महाराष्ट्र के सिरपुर में बाघ नदी पर स्थित है। इससे बड़वानी जिले को सिंचाई सुविधा का लाभ मिलता है।
काली सागर परियोजना (Kali Sagar Project)
वर्ष 1977 में प्रारम्भ यह बैतूल में काली नदी पर स्थित है। इसे बाघ की पूरक परियोजना के नाम से भी जाना जाता है। यह मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की संयुक्त परियोजना है।
बीला बाँध परियोजना (Beela Dam Project)
इस परियोजना का निर्माण वर्ष 1973 में सागर जिले में बीला नदी पर किया गया था। इससे सागर और छतरपुर को सिंचाई और पेयजल की सुविधा प्राप्त होती है।
अटल सागर परियोजना (Atal Sagar Project)
शिवपुरी जिले में सिंध नदी पर मड़ीखेड़ा बाँध निर्मित किया गया है जिसकी ऊँचाई 62 मीटर और लम्बाई 1072 मीटर है। इस परियोजना को वर्ष 2018 में अटल सागर परियोजना नाम दिया गया है। इससे 1.62 लाख हेक्टेयर में सिंचाई तथा 60 मेगावॉट जल विद्युत उत्पादन क्षमता प्रस्तावित है।
मोहनपुरा सिंचाई परियोजना
राजगढ़ जिले में नेवज नदी पर 456.50 मीटर लम्बा तथा 77.50 मीटर ऊँचा बाँध निर्मित किया गया है। जिसकी कुल जल संग्रहण क्षमता 61.63 करोड़ घन मीटर है। इस परियोजना से 1.34 लाख हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित होगा। मोहनपुरा सिंचाई परियोजना का लोकार्पण 23 जून, 2018 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किया गया।
नदी जोड़ो परियोजना (River Interlinking Project)
भारत में नदियों को आपस में जोड़ने का विचार सबसे पहले वर्ष 1848 में मद्रास प्रेसीडेंसी के मुख्य अभियन्ता सर आर्थर कॉटन ने रखा था। वर्ष 1960 में केन्द्रीय ऊर्जा एवं सिंचाई मंत्री के.एल. राव ने गंगा एवं कावेरी नदी को जोड़ने का प्रस्ताव रखा, जिसके पश्चात् नदी जोड़ो परियोजना पर अधिक बल दिया जाने लगा।
नर्मदा-क्षिप्रा लिंक (Narmada Kshipra link)
नर्मदा-क्षिप्रा लिंक की शुरुआत 29 नवम्बर, 2012 को हुई थी। इस परियोजना में ओंकारेश्वर (नर्मदा) बाँध से पानी क्षिप्रा नदी पर छोड़ा जा रहा है। यह परियोजना प्रदेश की नदियों पर आधारित प्रथम नदी जोड़ो परियोजना है। इस परियोजना से देवास, उज्जैन, शाजापुर व इंदौर जिलों का 16 लाख एकड़ क्षेत्र सिंचित होगा।
केन-बेतवा लिंक परियोजना (Ken- Betwa link Project)
- इसका शुभारम्भ 25 अगस्त, 2005 को प्रायद्वीपीय नदी विकास योजना के अन्तर्गत किया गया है। अमृत क्रान्ति के नाम से शुरू की गयी यह परियोजना देश की प्रमुख नदियों को जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
- यह अन्य राज्यों को अपने जल विवाद निपटारे हेतु प्रेरित करेगी। उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश की इस संयुक्त परियोजना के अन्तर्गत केन एवं बेतवा नदियों को जोड़ा जाएगा, जिससे दोनों राज्यों के जल की आपूर्ति वाले कई क्षेत्रों को पेयजल एवं सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध हो सकेगा।
- इस परियोजना से 8.81 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा तथा 72 मेगावॉट जल विद्युत का उत्पादन होगा।
- वर्ष 2017 में केन-बेतवा परियोजना के अन्तर्गत 73 मी. ऊँचा दौधन बाँध और 231 किमी. लम्बी नहर निर्मित की गयी है, जिसे बेतवा नदी पर निर्मित बरुआ सागर जलाशय से जोड़ा गया है।
- 22 मार्च, 2021 को इस परियोजना के क्रियान्वयन के लिए उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्रियों के मध्य समझौता पत्र पर हस्ताक्षर हुए।
| मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में स्थित बाँध | |
|---|---|
| बाँध | जिला |
| जाजूसागर | नीमच |
| शिवाजी सागर | नीमच |
| मावड़ा | देवास |
| माही | झाबुआ |
| पिलियाखाल | शाजापुर |
| करण | रतलाम |
| भरगोनी | इंदौर |
| रावलपाड़ा | धार |
| बैरहना | सतना |
| जरमोहरा | रीवा |
| गोपाल दास | सीधी |
| मोहन | सीधी |
| मादी | सिंगरौली |
| भीखमपुर | शहडोल |
| झलमला | शहडोल |
| उमरार | उमरिया |
| बिलगांव | डिंडोरी |
| बैरी | अनूपपुर |
| कुडवन | मंडला |
| कोहरी | मंडला |
| नहलेसरा | बालाघाट |
| झारा | बालाघाट |
| मोरवन | नीमच |
| चंद्रकेशर | देवास |
| सुकालिया | देवास |
| दादनिया | झाबुआ |
| टिलर | आगरमालवा |
| भमरिया | रतलाम |
| झिरवार | इंदौर |
| मौलानी | धार |
| अमझर | सतना |
| बमरहा | रीवा |
| गुलाब सागर | सीधी |
| विसेंधा | सीधी |
| झरीया | सिंगरौली |
| बरगवां | शहडोल |
| बाणसागर | शहडोल |
| मालाचुआ | उमरिया |
| ननुखार | डिंडोरी |
| दुल्ही | अनूपपुर |
| हालोन | मंडला |
| मोहगाँव | मंडला |
| गांगुलपारा | बालाघाट |
| परसाटोला | बालाघाट |
| चम्बलेश्वर | नीमच |
| पटपड़ी | देवास |
| पारस | देवास |
| चीलर | शाजापुर |
| कुंडालकोटेश्वर | रतलाम |
| यशवंत सागर | इंदौर |
| गांधी सागर | मंदसौर |
| अंधियारी सागर | सतना |
| इटमा कोठार | सतना |
| शेहरा | सीधी |
| नेबुहा | सीधी |
| मदलानी | सिंगरौली |
| छतौनी | शहडोल |
| मिठौरी | शहडोल |
| ओदारी | शहडोल |
| जोहिला | उमरिया |
| मुर्ता | डिंडोरी |
| थावर | मंडला |
| गुरली | मंडला |
| जमुनिया | मंडला |
| चांवर जल | बालाघाट |
| फुटका | बालाघाट |
| हमेरिया | नीमच |
| रणजीत | देवास |
| चंद्र शेखर आजाद | झाबुआ |
| लखुंदर | शाजापुर |
| धोलाबाड़ा | रतलाम |
| चोरल | इंदौर |
| चौसला | मंदसौर |
| कुलगढ़ी | सतना |
| बकिया | सतना |
| गोरियरा | सीधी |
| बरचर | सीधी |
| कसचन | सिंगरौली |
| मेहरा | शहडोल |
| लखनौती | शहडोल |
| समधिन | शहडोल |
| खरमेर | डिंडोरी |
| सारसडोली | डिंडोरी |
| मटियारी | मंडला |
| शेरमी | मंडला |
| कोका | मंडला |
| सर्राटी | बालाघाट |
| बोरबान | बालाघाट |
| कुदेरई | बालाघाट |
| डोकरिया | सिवनी |
| बोधिया | सिवनी |
| सुकड़ी | छिंदवाड़ा |
| पोआमा | छिंदवाड़ा |
| रूपनाथ | कटनी |
| कछारगांव | कटनी |
| जामुनचुआ | कटनी |
| दैत्यरिया | सागर |
| फतेहपुर | दमोह |
| घोघाटपुर | राजगढ़ |
| सेमरक्षिका | रायसेन |
| कलिया सेतू | भोपाल |
| खिरखिरी | श्योपुर |
| भीमगढ़ | सिवनी |
| डुंडा | सिवनी |
| कंचना मंडी | सिवनी |
| सावरखेड़ा | छिंदवाड़ा |
| करलई | छिंदवाड़ा |
| सारा | कटनी |
| मसंथा | कटनी |
| दाररिया | सागर |
| पाखरी घाट | दमोह |
| आनू | दमोह |
| नारायणपुरा | राजगढ़ |
| देहगान | रायसेन |
| केरवा | भोपाल |
| पगारा | मुरैना |
| बंदरा | सिवनी |
| केवलारी | सिवनी |
| माचागोरा | छिंदवाड़ा |
| बालकदेव | छिंदवाड़ा |
| सीता झिरी | छिंदवाड़ा |
| बहोली | कटनी |
| घुन्नौर | कटनी |
| चकरपुर | सागर |
| बनसकला | दमोह |
| हथकुरी | पन्ना |
| सराना | राजगढ़ |
| बरखेड़ी | रायसेन |
| छीपानेर | सीहोर |
| कोतवाल | मुरैना |
| दरबई | सिवनी |
| मुसल | सिवनी |
| किसनपुर | छिंदवाड़ा |
| सिंगोड़ी | छिंदवाड़ा |
| सकरबारा | कटनी |
| छपरी | कटनी |
| मधरहटा | कटनी |
| बचलोन | सागर |
| पाखड़ी | दमोह |
| कुंडलिया | राजगढ़ |
| सेमरखास | रायसेन |
| मोहालपुरा | भोपाल |
| गंजीत घाट | सीहोर |
| पिलुआ | मुरैना |

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