लघु सिंचाई परियोजनाएँ
मध्य प्रदेश सामान्य ज्ञान (MPGK) के अंतर्गत राज्य की कृषि और अर्थव्यवस्था को समझने के लिए 'लघु सिंचाई परियोजनाएँ' (Minor Irrigation Projects) एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। मध्य प्रदेश सरकार किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए जल संसाधन विकास पर विशेष जोर दे रही है। वर्तमान में राज्य में 303 लघु सिंचाई योजनाएं निर्माणाधीन हैं, जिनसे प्रदेश के लाखों हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को सीधा लाभ मिलेगा। इसके अतिरिक्त, मध्य प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसने सिंचाई प्रबंधन में महिलाओं की भागीदारी को कानूनी रूप से सुनिश्चित कर एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। इस लेख में हम मध्य प्रदेश की प्रमुख लघु सिंचाई परियोजनाओं, राज्य की कुल सिंचाई क्षमता, और 'आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश' के तहत भविष्य के लक्ष्यों के बारे में विस्तार से जानेंगे। यह जानकारी MPPSC और व्यापम जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से बेहद उपयोगी है।
💧 लघु सिंचाई क्षमता (2021-22)
- निर्माणाधीन योजनाएँ: 303
- कुल क्षमता: 994.02 हजार हेक्टेयर
👩 महिला सशक्तिकरण (प्रथम राज्य)
- सिंचाई प्रबंधन अधिनियम में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित।
- विशेषता: भू-धारक की पत्नी को भी भू-धारक की मान्यता प्राप्त है।
📊 वर्ष 2017-18 में स्वीकृत प्रमुख सिंचाई परियोजनाएँ
| परियोजना का नाम | प्रकार | जिला |
|---|---|---|
| छीताखुदरी परियोजना | मध्यम | जबलपुर |
| कोटेश्वर परियोजना | लघु | रतलाम |
| कैथ परियोजना | मध्यम | सागर |
| भावसा परियोजना | मध्यम | बुरहानपुर |
🎯 आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश: आगामी 3 वर्षों का लक्ष्य
जल संसाधन विभाग
(कृषकों को आत्मनिर्भर बनाने हेतु)
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निर्माणाधीन परियोजनाएँ
6.05 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता का सृजन
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नवीन परियोजनाएँ
05 लाख हेक्टेयर क्षेत्र हेतु कार्यों का प्रारम्भ
- मध्य प्रदेश में 303 लघु सिंचाई योजनाएँ निर्माणाधीन हैं। वर्ष 2021-22 तक राज्य में कुल लघु सिंचाई क्षमता 994.02 हजार हेक्टेयर है।
- वर्ष 2017-18 में छीताखुदरी मध्यम सिंचाई परियोजना (जबलपुर), कोटेश्वर लघु सिंचाई परियोजना (रतलाम), कैथ मध्यम सिंचाई परियोजना (सागर) तथा भावसा मध्यम सिंचाई परियोजा (बुरहानपुर) स्वीकृत की गई है जिनसे प्रदेश में 18,350 हजार हेक्टेयर सिंचाई क्षमता में वृद्धि होगी।
- आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश के अन्तर्गत कृषकों को आत्मनिर्भर बनाने हेतु जल संसाधन विभाग द्वारा निर्माणाधीन परियोजनाओं से आगामी 3 वर्षों में 6.05 लाख हेक्टेयर क्षेत्र अतिरिक्त सिंचाई क्षमता का सृजन एवं 05 लाख हेक्टेयर क्षेत्र हेतु नवीन परियोजनाओं के कार्य प्रारम्भ किये जाने का लक्ष्य है।
- मध्य प्रदेश देश का प्रथम राज्य है, जहाँ सिंचाई प्रबंधन में महिलाओं की भागीदारी एवं भूमिका अधिनियम के माध्यम से सुनिश्चित की गई। इसका उद्देश्य किसी भी जल उपभोक्ता क्षेत्र में ऐसे भू-धारकों की पत्नियाँ, जो कि भू-धारक नहीं है उनको भी भू-धारक मान्य किया गया है।
| सिंचाई क्षमता एवं उपयोग (हजार हेक्टेयर में) | |||
|---|---|---|---|
| वर्ष | वृहद एवं मध्यम | लघु | कुल |
| 2016-17 | 1998.63 | 904.11 | 2902.74 |
| 2017-18 | 1814.16 | 658.88 | 2473.04 |
| 2018-19 | 2080.32 | 889.06 | 2969.38 |
| 2019-20 | 2116.3 | 1008.70 | 3125.01 |
| 2020-21 | 2553.78 | 1029.67 | 3383.46 |
| 2021-22 | 2505.25 | 994.02 | 3499.28 |

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