मिश्रित लाल एवं काली मृदा (मध्य प्रदेश)

मिश्रित लाल एवं काली मृदा

मिश्रित लाल एवं काली मृदा के बारे में सम्पूर्ण जानकारी। इसमें आपको यह जानने को मिलेगा कि यह मृदा किस प्रकार की होती है, इसका निर्माण कैसे होता है, मध्य प्रदेश में इसका कितना विस्तार है, किन-किन जिलों में यह पाई जाती है, तथा यह किन फसलों की खेती के लिए उपयुक्त होती है।
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इस मृदा को लाल-रेतीली मृदा के नाम से भी जाना जाता है, जो सभी प्रकार की मिट्टियों का मिश्रण है। यह मृदा नीस व ग्रेनाइट चट्टानों के विखण्डन से निर्मित है।
मिश्रित मृदा मध्य प्रदेश के 8.11 मिलियन हेक्टयेर क्षेत्रफल में पायी जाती है, जो राज्य के कुल क्षेत्रफल का 18.30% भाग है।
इस मृदा का विस्तार मंडला, डिंडोरी, बालाघाट, रीवा, सतना, पन्ना छतरपुर, टीकमगढ़, शिवपुरी, गुना आदि जिलों में है।
मध्य प्रदेश में यह मृदा लाल-पीली मृदा तथा काली मृदा के क्षेत्रों में मिश्रित रूप में तथा बुन्देलखंड के कुछ भागों में रेत और बालू के साथ मिश्रित रूप में पायी जाती है।
मिश्रित मृदा ज्वार और बाजरा जैसे मोटे अनाजों की कृषि के लिए उपयुक्त होती है।

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Kartik Budholiya

Kartik Budholiya

प्रतियोगी परीक्षाओं के मार्गदर्शक Kartik Budholiya को मध्य प्रदेश की प्रशासनिक और सांस्कृतिक व्यवस्थाओं का गहन अनुभव है। वे MPPSC और अन्य राज्य स्तरीय परीक्षाओं के लिए सटीक विश्लेषण और प्रमाणिक अध्ययन सामग्री तैयार करने के लिए जाने जाते हैं।