राज्य विधायिका
भारत के संविधान के अनुच्छेद 168 से 177 के अंतर्गत राज्य विधायिका से संबंधित प्रावधान दिए गए हैं। मध्य प्रदेश में एकसदनात्मक राज्य विधायिका (विधान सभा) है, जिसका गठन राज्य में विधायी कार्यों के संचालन हेतु किया गया है।
राज्य में विधायिका का विकास
मध्य प्रदेश राज्य के गठन के बाद 1957 में पहली बार विधान सभा का गठन किया गया था। शुरुआत में इस विधानसभा में कुल 288 सदस्य शामिल थे, जिनमें:
- 43 सीटें अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित थीं।
- 54 सीटें अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित थीं।
विधान सभा सीटों में परिवर्तन
समय के साथ मध्य प्रदेश विधान सभा की सीटों की संख्या में कई बदलाव हुए:
- 1976 में विधान सभा सदस्यों की संख्या 296 हो गई।
- 1999 में यह बढ़कर 320 हो गई।
- 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद, मध्य प्रदेश विधान सभा की सीटों की संख्या घटकर 230 रह गई।
मौजूदा विधानसभा संरचना
वर्तमान में 230 विधानसभा सीटों का वर्गीकरण इस प्रकार है:
- 148 सीटें – सामान्य वर्ग के लिए।
- 35 सीटें – अनुसूचित जाति (SC) के लिए।
- 47 सीटें – अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए।
| वर्ष | विधानसभा (निर्वाचित + मनोनीत) | आरक्षित |
|---|---|---|
| 1957 | 288 | 43 (SC), 54 (ST) |
| 1976 | 296 | - |
| 1999 | 320 | - |
| 2000 | 230 | 35 (SC), 47 (ST) |
राज्य विधानमंडल
राज्यपाल(Governor)
विधान सभा(Legislative Assembly)
मध्य प्रदेश राज्य की विधायिका का एक समृद्ध इतिहास रहा है, जिसमें कई संवैधानिक परिवर्तन देखने को मिले। आज यह विधानसभा 230 निर्वाचित सदस्यों के साथ राज्य के प्रशासनिक और विधायी कार्यों का संचालन कर रही है।
3. राजनैतिक व्यवस्था

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