मध्य प्रदेश में स्थानीय स्वशासन

मध्य प्रदेश में स्थानीय स्वशासन

मध्य प्रदेश राज्य पुनर्गठन के पश्चात् स्थानीय प्रशासन के दृष्टिकोण से वर्ष 1962 में काशीप्रसाद पांडे के नेतृत्व में गठित पांडे समिति की अनुशंसा के आधार पर प्रथम बार मध्य प्रदेश पंचायत राज अधिनियम-1962 लागू किया गया और ग्राम पंचायत स्तर पर वर्ष 1965 में चुनाव संपन्न करवाए गये, जबकि जनपद पंचायत के चुनाव सर्वप्रथम वर्ष 1971 में हुए। वर्ष 1981 में मध्य प्रदेश पंचायत अध्यादेश 1981 लागू किया गया।
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मध्य प्रदेश पंचायती राज

वर्ष 1981 में मध्य प्रदेश पंचायती राज अधिनियम स्वीकृत किया गया, जिसमें त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया।
मध्य प्रदेश में 73वें संविधान संशोधन (1992) को क्रियान्वित करने के लिए 29 दिसम्बर, 1993 को मध्य प्रदेश पंचायती राज अधिनियम 1993 लाया गया, जिसे 24 जनवरी, 1994 को राज्यपाल की स्वीकृति के पश्चात् 20 अगस्त, 1994 को लागू किया गया।
  • मध्य प्रदेश पंचायती राज अधिनियम 1993 का प्रथम संशोधन 27 सितम्बर, 1994 को किया गया था, जिसमें सहयोजन प्रथा को समाप्त कर ग्राम सभा की मासिक बैठक की अनुशंसाओं को बाध्यकारी बनाया गया।
  • इस अधिनियम में द्वितीय संशोधन 23 दिसम्बर, 1994 को किया गया जिसमें जनपद तथा जिला पंचायतों को उनकी स्थायी समितियों की संख्या एवं विषय परिवर्तन के अधिकार दिए गये और जिला एवं जनपद पंचायत के उपाध्यक्षों को शिक्षा समिति का अध्यक्ष बनाया गया।
  • इस अधिनियम का तृतीय संशोधन 19 दिसम्बर, 1995 को किया गया, जिसमें ग्राम सभा की बैठक को अनिवार्य बना दिया गया।
  • मध्य प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1993 का चतुर्थ संशोधन 28 दिसंबर, 1996 को किया गया, जिसमें पंचायत सम्बंधी चुनाव में आरक्षण व्यवस्था को तर्कसंगत बनाया गया और पंचायत निधि निर्माण सम्बंधी प्रावधान किए गए।
  • इस अधिनियम का पंचम संशोधन 26 जनवरी, 2001 को किया गया, जिसमें मध्य प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1993 का नाम मध्य प्रदेश पंचायत राज कर दिया गया। इस संशोधन का प्रमुख उद्देश्य, ग्राम सभा को अधिक सदृढ़ और प्रभावशाली बनाना था। इस अधिनियम के अनुसार, मध्य प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था लागू की गई है- जिला पंचायत, जनपद पंचायत व ग्राम पंचायत।
  • जिला पंचायत 50,000 से अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्र में एक जिला पंचायत का गठन किया जाता है, जिसके सदस्यों की संख्या 10 से 35 होती है। जिला पंचायत के सदस्यों को जनता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से जबकि अध्यक्ष व उपाध्यक्ष को निर्वाचित सदस्यों द्वारा चुना (अप्रत्यक्ष निर्वाचन) जाता है। जनपद पंचायत के अध्यक्ष, विधायक व सांसद इसके पदेन सदस्य होते हैं। मध्य प्रदेश में 52 जिला पंचायतें हैं। जिला पंचायत का सचिव जिले का मुख्य विकास अधिकारी/जिला पंचायत अधिकारी होता है।
जनपद पंचायत - 5,000 से अधिक जनसंख्या वाले विकासखण्ड में एक जनपद पंचायत का गठन किया जाता है, जिसमें 10 से 25 सदस्य होते हैं। सदस्यों का चुनाव प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा, जबकि अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का चुनाव सदस्यों द्वारा (अप्रत्यक्ष निर्वाचन) किया जाता है। इसके अतिरिक्त, सरपंच और विधायक इसके पदेन सदस्य होते हैं। वर्तमान मध्य प्रदेश में 313 जनपद पंचायतें हैं। जनपद पंचायत का सचिव खंड विकास अधिकारी (BDO) होता है।
ग्राम पंचायत - 1,000 से अधिक जनसंख्या वाले गाँव में एक ग्राम पंचायत गठित की जाती है, जिसमें 10 से 20 सदस्य होते हैं। इसका मुखिया सरपंच व सदस्य पंच प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा जबकि उप सरपंच को अप्रत्यक्ष रूप से पंचों द्वारा चुना जाता है। वर्तमान मध्य प्रदेश में पंचायतों की संख्या 23,006 है।
ग्राम पंचायतें अपने गाँव की सफाई, पेय जल व्यवस्था, प्रकाश व्यवस्था, आंगनबाड़ियों का संचालन, ग्रामीण विकास कार्यक्रम की निगरानी आदि कार्य करती हैं।

ग्राम न्यायालय
ग्रामीण स्तर पर न्याय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश ग्राम न्यायालय अधिनियम, 1996 के अन्तर्गत् 26 जनवरी, 2001 को 219 ग्राम न्यायालयों की स्थापना की गई है।
मध्य प्रदेश का प्रथम ग्राम न्यायालय नीमच जिले की ग्राम पंचायत झांतला में स्थापित किया गया है।
भारत सरकार द्वारा प्रथम ग्राम न्यायालय की स्थापना 2 अक्टूबर, 2009 को बैरसिया (भोपाल) में की गयी थी।

पंचायत राज्य : विशिष्ट तथ्य

मध्य प्रदेश में 26 जनवरी, 2001 से लागू ग्राम स्वराज कार्यक्रम के अन्तर्गत ग्राम सभा को प्रतिनिधि इकाई मानकर व्यापक अधिकार सौंपे गए हैं।
ग्राम पंचायतों के सम्पूर्ण कार्य हेतु एक सचिव की नियुक्ति की जाती है, जिसे 12 सितम्बर, 1985 से डाईंग कैडर (समाप्तप्राय) घोषित किया गया है।
30 मार्च, 2007 से पंचायतों और स्थानीय निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान किया गया है। भारत में बिहार के पश्चात् मध्य प्रदेश महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने वाला दूसरा राज्य है।
वर्ष 1987 से विकास कार्यों में श्रेष्ठतम गतिविधियों के लिये ग्राम पंचायतों को प्रतिवर्ष पुरस्कृत किया जाता है। इस पंचायत पुरस्कार योजना में सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत को 25 हजार रुपये, संभाग स्तर पर जनपद पंचायत को 5 लाख रुपये व जिला स्तर पर जिला पंचायत को 25 लाख रुपये पुरस्कार राशि प्रदान की जाती है।
मध्य प्रदेश में पंचायत राज अधिनियम, 1993 की धारा 77 के अन्तर्गत ग्राम सभा/जनपद पंचायत को करारोपण का अधिकार दिया गया है तथा वाणिज्य कर पर 10 प्रतिशत व अधिभार की आय का 30 प्रतिशत भाग ग्राम पंचायत को सहायक अनुदान स्वरूप उपलब्ध कराया जाता है।
मध्य प्रदेश में ग्रामीणों की समस्याओं का त्वरित व स्थानीय स्तर पर निराकरण करने के लिए 8 अगस्त, 2004 से ग्राम सचिवालय की व्यवस्था की गई है।

मध्य प्रदेश में नगरीय स्थानीय शासन

मध्य प्रदेश के पुनर्गठन के बाद, वर्ष 1956 में पहला नगर पालिका अधिनियम लागू किया गया, जिसके तहत नगर निगमों की स्थापना की गई। नगर निकायों की संरचना को और अधिक प्रभावी बनाने हेतु, वर्ष 1957 में गठित एक सरकारी समिति ने 1958 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसके आधार पर मध्य प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1961 पारित किया गया। इसके बाद, 74वें संविधान संशोधन (1992) के माध्यम से नगरीय निकायों को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया, और इस संशोधन को लागू करने वाला मध्य प्रदेश पहला राज्य बना।
इस संशोधन के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु मध्य प्रदेश नगरपालिका निगम अधिनियम, 1994 पारित किया गया, जिसके अंतर्गत प्रदेश में त्रि-स्तरीय नगरीय निकाय प्रणाली स्थापित की गई। इस व्यवस्था के अंतर्गत निम्नलिखित निकाय आते हैं:

1. नगर निगम
वे नगर, जिनकी जनसंख्या 1 लाख से अधिक होती है, नगर निगम के अंतर्गत आते हैं।
  • इसमें सदस्यों की संख्या 40 से 70 तक होती है।
  • इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार द्वारा 6 विशेषज्ञ सदस्य मनोनीत किए जाते हैं।
  • क्षेत्रीय सांसद एवं विधायक पदेन सदस्य होते हैं।
  • नगर निगम का अध्यक्ष महापौर तथा सदस्य पार्षद कहलाते हैं, जिनका चुनाव जनता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से किया जाता है।
  • नगर निगम का मुख्य प्रशासनिक अधिकारी नगर निगम आयुक्त होता है।
  • वर्तमान में मध्य प्रदेश में 17 नगर निगम हैं।

मध्य प्रदेश में नगर निगम
1. इंदौर 2. भोपाल 3. जबलपुर
4. ग्वालियर 5. सागर 6. रीवा
7. उज्जैन 8. खंडवा 9. बुरहानपुर
10. रतलाम 11. देवास 12. सिंगरौली
13. कटनी 14. सतना 15. छिंदवाड़ा
16. मुरैना 17. भिंड 18. दतिया (प्र.)

2. नगर पालिका
जिन नगरों की जनसंख्या 50,000 से अधिक होती है, वहाँ नगर पालिका स्थापित की जाती है।
  • इसमें 15 से 40 सदस्य होते हैं।
  • राज्य सरकार द्वारा 4 विशेषज्ञ सदस्य मनोनीत किए जाते हैं।
  • संबंधित क्षेत्र के सांसद एवं विधायक इसके पदेन सदस्य होते हैं।
  • अध्यक्ष एवं पार्षदों का चुनाव जनता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से किया जाता है, जबकि उपाध्यक्ष का निर्वाचन पार्षदों द्वारा किया जाता है।
  • प्रशासनिक कार्यों के लिए मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) नियुक्त किया जाता है।
  • वर्तमान में प्रदेश में 99 नगर पालिकाएँ कार्यरत हैं।

3. नगर परिषद
वे क्षेत्र, जिनकी जनसंख्या 20,000 से अधिक हो और जो गाँव से नगर में विकसित हो रहे हों, नगर परिषद के अंतर्गत आते हैं।
  • इसमें 15 से 40 सदस्य होते हैं।
  • राज्य सरकार द्वारा 2 विशेषज्ञ सदस्य नामित किए जाते हैं।
  • क्षेत्रीय विधायक इसके पदेन सदस्य होते हैं।
  • नगर परिषद के अध्यक्ष एवं पार्षदों का चुनाव जनता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से किया जाता है, जबकि उपाध्यक्ष का निर्वाचन पार्षदों द्वारा किया जाता है।
  • वर्तमान में मध्य प्रदेश में 264 नगर परिषदें कार्यरत हैं।

नगरीय प्रशासनः विशिष्ट तथ्य

मध्य प्रदेश में सर्वप्रथम नगर निगम का गठन वर्ष 1864 में जबलपुर में किया गया था।
ग्वालियर नगर निगम का गठन वर्ष 1887 में किया गया था।
मध्य प्रदेश की प्रथम नगरीय संस्था वर्ष 1907 में मजलिस-ए-इंतजामिया गठित की गई थी।
मध्य प्रदेश की प्रथम नगर पालिका दतिया में वर्ष 1907 में गठित की गई थी।
भोपाल नगर निगम वर्ष 1983 में भोपाल नगर परिषद् के 56 वार्डों को मिलाकर गठित किया गया।
मध्य प्रदेश की पहली किन्नर महापौर कटनी नगर निगम में कमला जान (1999-2000) निर्वाचित की गई थी।
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मध्य प्रदेश के लोक सभा क्षेत्र
अनारक्षित (सामान्य) आरक्षित (SC) आरक्षित (ST)
छिंदवाड़ादेवासशहडोल
मंदसौरटीकमगढ़मंडवा
खंडवाउज्जैनबैतूल
ग्वालियरभिंडरतलाम
राजगढ़धार
दमोहखरगौन
सीधी
बालाघाट
रीवा
मुरैना
सागर
भोपाल
इंदौर
विदिशा
गुना
होशंगाबाद
सतना
जबलपुर
छतरपुर

 मध्य प्रदेश से वर्तमान राज्यसभा सदस्य
सदस्य कार्यकाल (वर्ष)
श्री दिग्विजय सिंह (कांग्रेस)2020-2026
श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया (बीजेपी)2020-2026
श्री डॉ. सुमेर सिंह (बीजेपी)2020-2026
श्रीमती कविता (बीजेपी)2022-2028
श्रीमती सुमित्रा (बीजेपी)2022-2028
श्री विवेक कृष्ण तन्खा (कांग्रेस)2022-2028
श्री अजय प्रताप सिंह (बीजेपी)2018-2024
श्री कैलाश सोनी (बीजेपी)2018-2024
श्री डॉ. एल. मुरूगन (बीजेपी)2018-2024
श्री धर्मेंद्र प्रधान (बीजेपी)2018-2024
श्री राजमणि पटेल (कांग्रेस)2018-2024

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Kartik Budholiya

Kartik Budholiya

प्रतियोगी परीक्षाओं के मार्गदर्शक Kartik Budholiya को मध्य प्रदेश की प्रशासनिक और सांस्कृतिक व्यवस्थाओं का गहन अनुभव है। वे MPPSC और अन्य राज्य स्तरीय परीक्षाओं के लिए सटीक विश्लेषण और प्रमाणिक अध्ययन सामग्री तैयार करने के लिए जाने जाते हैं।