भोपाल राज्य (मध्य प्रदेश)

भोपाल राज्य

स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात भोपाल वर्ष 1949 तक एक स्वतंत्र राज्य के रूप में स्थापित रहा। इस राज्य के अंतिम शासक नवाब हमीदउल्लाह खान थे। 1 जून, 1949 को भोपाल को भाग-ग में सम्मिलित किया गया और इसे प्रशासनिक दृष्टि से दो जिलों भोपाल और सीहोर में विभाजित किया गया। इन जिलों के अंतर्गत कुल 14 तहसीलें शामिल थीं।
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भोपाल राज्य और प्रशासनिक परिवर्तन

वर्ष 1952 में डॉ. शंकर दयाल शर्मा को भोपाल राज्य का मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया। तत्पश्चात, वर्ष 1956 में भाषायी आधार पर मध्य प्रदेश का पुनर्गठन किया गया। इसके अन्तर्गत राज्य पुनर्गठन आयोग (State Reorganisation Commission) की अनुशंसा पर मध्य प्रदेश के दक्षिण में स्थित मराठी भाषी क्षेत्र विदर्भ एवं नागपुर को महाराष्ट्र में सम्मिलित कर दिया गया।
  1. हिन्दी भाषी क्षेत्रों का समावेश: मध्य प्रान्त के अंतर्गत हिन्दी भाषी क्षेत्र को मध्य प्रदेश में रखा गया, जबकि महाकौशल के अकोला, अमरावती, बुलढाना, यवतमाल, वर्धा, नागपुर, चाँदा, और भण्डारा जैसे क्षेत्रों को महाराष्ट्र में सम्मिलित किया गया।
  2. मध्य भारत में क्षेत्रीय विनिमय: कोटा जिले की सिरौंज तहसील को विदिशा में तथा मंदसौर जिले की तहसील भानपुरा के सुनेलटप्पा क्षेत्र को राजस्थान के कोटा जिले में सम्मिलित किया गया।
  3. विन्ध्य प्रदेश और भोपाल का समावेश: भाग-ग के अंतर्गत विन्ध्य प्रदेश तथा भोपाल को मध्य प्रदेश में यथावत रखा गया।

मध्य प्रदेश राज्य का निर्माण एवं पुनर्गठन
काल विवरण
प्राचीन काल अवन्ति एवं चेदि महाजनपदों के रूप में
मध्य काल स्वतंत्र मुस्लिम सल्तनत, फारूकी शासन तथा गोंड वंश के अधीन प्रशासनिक इकाई के रूप में
आधुनिक काल
वर्ष 1853 सेंट्रल इंडिया एजेंसी, सेंट्रल प्रोविंस तथा बरार के रूप में
वर्ष 1947 भाग- क, ख, ग तथा स्वतंत्र राज्य भोपाल के रूप में
वर्ष 1956 मध्य प्रदेश के कुछ क्षेत्र राजस्थान को तथा मराठी भाषा क्षेत्र महाराष्ट्र को स्थानांतरित
1 नवम्बर, 2000 मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़ पृथक हुआ तथा राज्य का वर्तमान स्वरूप अस्तित्व में आया

मध्य प्रदेश का पुनर्गठन और सीमाओं का निर्धारण

1956 में मध्य प्रदेश के गठन के समय राज्य में कुल 8 संभाग और 43 जिले सम्मिलित थे। इसके बाद मध्य प्रदेश की राजनीतिक सीमाओं का अंतिम निर्धारण 1 नवम्बर, 2000 को हुआ, जब प्रदेश के दक्षिण-पूर्वी भाग के 3 संभागों और 16 जिलों को पृथक कर छत्तीसगढ़ राज्य का गठन किया गया। यह पुनर्गठन प्रशासनिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए किया गया था और इससे क्षेत्रीय संतुलन एवं प्रशासनिक सुगमता सुनिश्चित हुई।
भोपाल राज्य का स्वतंत्रता पश्चात का इतिहास एवं मध्य प्रदेश के पुनर्गठन की प्रक्रिया भारतीय प्रशासनिक ढांचे में एक महत्वपूर्ण अध्याय है। नवाब हमीदउल्लाह खान के शासन से लेकर मध्य प्रदेश के एक प्रमुख हिस्से के रूप में इसके एकीकरण तक की यात्रा, राज्य के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

राज्य सरकारों एवं उनकी कार्यप्रणाली का वर्णन संविधान के भाग-6 में अनुच्छेद-152 से अनुच्छेद-237 के अन्तर्गत किया गया है।

यह ऐतिहासिक घटनाएँ दर्शाती हैं कि किस प्रकार प्रशासनिक और भाषाई आधार पर राज्यों का पुनर्गठन किया गया और कैसे मध्य प्रदेश को वर्तमान स्वरूप प्रदान किया गया।

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Kartik Budholiya

Kartik Budholiya

प्रतियोगी परीक्षाओं के मार्गदर्शक Kartik Budholiya को मध्य प्रदेश की प्रशासनिक और सांस्कृतिक व्यवस्थाओं का गहन अनुभव है। वे MPPSC और अन्य राज्य स्तरीय परीक्षाओं के लिए सटीक विश्लेषण और प्रमाणिक अध्ययन सामग्री तैयार करने के लिए जाने जाते हैं।