मालवा में स्वतंत्र मुस्लिम सल्तनत की स्थापना

मालवा में स्वतंत्र मुस्लिम सल्तनत की स्थापना

परमार वंश के पतन के पश्चात् मालवा का शासन दिल्ली सल्तनत के अधीन हो गया। तैमूर के आक्रमण के समय नासिरुद्दीन महमूद मालवा में आया, जिसे मालवा के सूबेदार दिलावर खाँ ने संम्प्रभु मानकर सम्मान प्रदान किया। दिलावर खाँ 1390 ई. से 1401 ई. तक तुगलक वंश के अधीन मालवा का सूबेदार रहा।
malwa-swatantra-muslim-saltanat-sthapna
नासिरुद्दीन द्वितीय के मालवा से प्रस्थान करने के पश्चात् 1401 ई. में दिलावर खाँ ने मालवा में स्वतंत्र मुस्लिम राज्य की स्थापना की। उसका वास्तविक नाम हुसैन था और वह दमिश्क के सुल्तान शहाबुद्दीन का वंशज था। उसने अपने पुत्र अल्प खाँ के आग्रह पर सुल्तान आदिमशाह दाऊद दिलावर खाँ गौरी की पदवीं धारण की और धार को अपनी राजधानी बनाया।
  • 1406 ई. में दिलावर खाँ की मृत्यु के बाद उसका पुत्र होशंगशाह गौरी (अल्प खाँ) गद्दी पर बैठा। उसका मूलनाम अल्प खाँ था, उसने धार से अपनी राजधानी शादियाबाद (मांडू) स्थानांतरित की थी।
  • 1420 ई. में होशंगशाह ने जाजनगर अभियान के दौरान खरेला पर और 1423 ई. में गारगौन के किले में अपना अधिकार कर लिया था, किन्तु 1428 ई. में अहमदशाह बहमनी ने खरेला पर आक्रमण कर उसे पराजित कर दिया।
  • 6 जुलाई, 1435 को होशंगशाह की मृत्यु के बाद उसे मांडू में दफनाया गया तथा 1436 ई. में उसके मकबरे का निर्माण महमूद खिलजी ने करवाया। होशंगशाह का मकबरा मध्य प्रदेश का मकबरा कहलाता है। उसकी मृत्यु के पश्चात् 8 जुलाई, 1435 को गजनी खाँ मोहम्मद शाह गोरी के नाम से मालवा का सुल्तान बना और महमूद खाँ को उसका संरक्षक नियुक्त किया गया।
गजनी खाँ एक निरंकुश शासक था, जिसकी 8 अप्रैल, 1436 ई. को मलिक मुगीस और संरक्षक महमूद खाँ द्वारा जहर देकर हत्या कर दी गई।

मालवा की प्रारम्भिक मस्जिदें (1400-1425 ई. में निर्मित)

क्रमांक मस्जिद का नाम स्थान
1 कमाल मौला मस्जिद धार
2 लाट मस्जिद धार
3 दिलावर खाँ मस्जिद माण्डू
4 मलिक मुगीस मस्जिद माण्डू

  • 16 मई, 1436 को महमूद खाँ मांडू की गद्दी पर बैठा। उसने अपने विश्वस्त अमीर मुर्शीद-उल-मुल्क को निजाम-उल-मुल्क की उपाधि प्रदान कर वजीर तथा मलिक बरखुरदार को ताज खाँ की उपाधि प्रदान कर आरिज-ए-मुमालिक नियुक्त किया। अपने पिता मलिक मुगीस को आजम हुमायूँ की उपाधि प्रदान की।
  • 31 मई, 1469 को महमूद खाँ की मृत्यु के पश्चात् उसका पुत्र गियाथ शाह या ग्यासुद्दीन खिलजी (1469-1500ई.) सिंहासन पर बैठा।
  • 26 मार्च, 1501 को ग्यासुद्दीन की मृत्यु के पश्चात् उसका बड़ा पुत्र नासिरुद्दीन अब्दुल मुजफ्फर नासिर शाह के नाम से मालवा के राजसिंहासन पर बैठा। उसके शासन काल के दौरान ईश्वर सूरि नामक कवि ने ललिता चरित्र नामक ग्रंथ की रचना की थी।
  • 1510 ई. में नासिरुद्दीन की मृत्यु के पश्चात् 2 मई, 1511 की महमूद शाह खिलजी द्वितीय का राज्याभिषेक शिष्टपुर में हुआ, किन्तु उसके भाई शिहाबुद्दीन और साहिब खाँ ने उसके राज्यारोहण का विरोध किया। उसने रायचंद्र पुरबिया को मेदिनी राय की उपाधि प्रदान कर उसे अपना मुख्य सलाहकार बनाया था।
  • 1512 ई. में सतवारा के सिकन्दर खाँ तथा चंदेरी के बहजत खाँ ने महमूद शाह खिलजी द्वितीय के विरुद्ध विद्रोह कर दिया। तब उसने मेदिनी राय को इन विद्रोहों के दमन के लिए भेजा और अन्त में 12 जुलाई, 1514 को चंदेरी पर अधिकार कर लिया।
  • वर्ष 1531 में गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह ने मालवा पर आक्रमण कर मांडू पर अधिकार कर लिया। 1535 में हुमायूँ ओर बहादुरशाह के मध्य मदंसौर में युद्ध हुआ जिसमें हुमायूँ ने बहादुरशाह को पराजित किया। और मल्लू खाँ अथवा कादिर शाह (1537-1542 ई.) को मालवा का सूबेदार नियुक्त किया। उसी समय शेरशाह ने उत्तर भारत में अपनी स्थिति को सुदृढ़ करने के पश्चात् मालवा पर आक्रमण किया, जिसके भय से कादिरशाह गुजरात चला गया।
शेरशाह ने शुजायत खाँ, हाजी खाँ और जुनैद खाँ को हण्डिया, सतवास, धार और माण्डू में सूबेदार नियुक्त किया और 1543 ई. में रायसेन पर पूरनमल के विरुद्ध आक्रमण कर विजय प्राप्त की तथा शुजायत खाँ को मालवा का सूबेदार नियुक्त कर वापस चला गया।
1556 ई. में शुजायत खाँ की मृत्यु के बाद उसका पुत्र मियाँ बाईजिद खाँ (बाज बहादुर) मालवा का सुल्तान बना। उसने अपने साम्राज्य विस्तार के उद्देश्य से गढ़ा राज्य (गोंड शासिका रानी दुर्गावती) पर अनेक आक्रमण किए, किन्तु वह असफल रहा। इसके बाद वह अपनी रानी रूपमती के साथ संगीत व ललित कलाओं के उन्नयन में व्यस्त हो गया। उसने राग मालवी, राग गुजरी मूपकल्याण, रागिनी, तोड़ीराग, बाजखानी ख्याल आदि रागों की रचना की।

2. मध्य प्रदेश का इतिहास
Tags:
1: मध्य प्रदेश का सामान्य परिचय MCQ 2: मध्य प्रदेश का इतिहास MCQ 3: मध्य प्रदेश का भौगोलिक अध्ययन MCQ 4: मध्य प्रदेश की जलवायु MCQ 5: मध्य प्रदेश की मृदा MCQ 6: मध्य प्रदेश का अपवाह तंत्र MCQ 7: मध्य प्रदेश की बहुउद्देशीय योजनाएं MCQ 8: मध्य प्रदेश के वन एवं वन्यजीव और पर्यावरण MCQ 9: मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय उद्यान एवं अभयारण्य MCQ 10: मध्य प्रदेश में कृषि एवं पशुपालन MCQ 11: मध्य प्रदेश में खनिज एवं ऊर्जा संसाधन MCQ 12: मध्य प्रदेश का औद्योगीकरण एवं नियोजन MCQ 13: मध्य प्रदेश में परिवहन MCQ 14: मध्य प्रदेश की राजव्यवस्था MCQ 15: मध्य प्रदेश में पंचायती राज एवं नगरीय निकाय MCQ 16: मध्य प्रदेश के प्रमुख संवैधानिक एवं सांविधिक संस्थाएं MCQ 17: मध्य प्रदेश का पुलिस एवं प्रशासन MCQ 18: मध्य प्रदेश में पत्रकारिता एवं जनसंपर्क व जनसंचार MCQ 19: मध्य प्रदेश में पंचवर्षीय योजनाएं MCQ 20: मध्य प्रदेश में प्रमुख कल्याणकारी योजनाएं MCQ 21: मध्य प्रदेश में जनगणना एवं जनांकिकी MCQ 22: मध्य प्रदेश में शिक्षा एवं स्वास्थ्य MCQ 23: मध्य प्रदेश में अनुसूचित जाति एवं जनजातियां MCQ 24: मध्य प्रदेश में स्थापत्य कला MCQ 25: मध्य प्रदेश में लोक कला एवं लोक संस्कृति MCQ 26: मध्य प्रदेश में पर्यटन एवं ऐतिहासिक स्थल MCQ 27: मध्य प्रदेश में भाषा, साहित्य एवं प्रमुख साहित्यिक संस्थाएं MCQ 28: मध्य प्रदेश के पुरस्कार एवं सम्मान MCQ 29: मध्य प्रदेश के प्रमुख व्यक्तित्व MCQ 30: मध्य प्रदेश का खेलकूद परिदृश्य MCQ 31: मध्य प्रदेश का जिलेवार MCQ 32: विविध MCQ

Comments

Post a Comment

Kartik Budholiya

Kartik Budholiya

प्रतियोगी परीक्षाओं के मार्गदर्शक Kartik Budholiya को मध्य प्रदेश की प्रशासनिक और सांस्कृतिक व्यवस्थाओं का गहन अनुभव है। वे MPPSC और अन्य राज्य स्तरीय परीक्षाओं के लिए सटीक विश्लेषण और प्रमाणिक अध्ययन सामग्री तैयार करने के लिए जाने जाते हैं।