भोपाल रियासत (मध्य प्रदेश)

भोपाल रियासत

भोपाल रियासत, जो वर्तमान मध्य प्रदेश का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थी, की स्थापना मुगल सेना के एक अफगान सिपाही दोस्त मुहम्मद खान द्वारा 1723-1724 ईस्वी में की गई थी। यह रियासत मध्यकालीन भारत के राजनीतिक परिदृश्य में एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभरी थी।
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भोपाल रियासत की स्थापना

भोपाल रियासत की नींव दोस्त मुहम्मद खान ने डाली थी, जिन्हें रानी कमलापति की सहायता करने के बदले यह राज्य उपहार स्वरूप प्राप्त हुआ था। प्रारंभ में, उन्होंने भोपाल से लगभग 10 किमी दूर स्थित जगदीशपुर को जीतकर अपनी राजधानी बनाया और इसका नाम बदलकर इस्लाम नगर रखा। इस शहर को उन्होंने अपनी प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र बनाया।

दोस्त मुहम्मद खान का शासन

दोस्त मुहम्मद खान ने अपनी शक्ति को बढ़ाने के लिए आसपास के क्षेत्रों पर विजय प्राप्त की। उन्होंने सीहोर, आष्टा, खिलजीपुर, गिन्नौरगढ़, और देवीपुरा जैसे महत्वपूर्ण स्थानों को जीतकर अपनी सत्ता को सुदृढ़ किया। उनकी विजय यात्राओं के चलते उन्हें "नवाब" की उपाधि से नवाजा गया।

यार मुहम्मद खान और एंग्लो-भोपाल संधि

1728 ईस्वी में दोस्त मुहम्मद खान की मृत्यु के बाद, उनका पुत्र यार मुहम्मद खान भोपाल राज्य का प्रथम नवाब बना। उनके शासनकाल में मार्च 1818 में एंग्लो-भोपाल संधि हुई, जिसने ब्रिटिश शासन के साथ भोपाल रियासत के संबंधों को निर्धारित किया। यह संधि भोपाल राज्य के राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना थी, जिसने इसे ब्रिटिश प्रभाव में ला दिया।
भोपाल रियासत का इतिहास न केवल इसकी स्थापना और विस्तार को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि किस प्रकार यह राज्य मध्यकालीन और औपनिवेशिक भारत के बीच एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा। दोस्त मुहम्मद खान और उनके उत्तराधिकारियों ने इस राज्य को सशक्त बनाया, जिससे यह ब्रिटिश भारत के महत्वपूर्ण राज्यों में से एक बन गया।

2. मध्य प्रदेश का इतिहास

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Kartik Budholiya

Kartik Budholiya

प्रतियोगी परीक्षाओं के मार्गदर्शक Kartik Budholiya को मध्य प्रदेश की प्रशासनिक और सांस्कृतिक व्यवस्थाओं का गहन अनुभव है। वे MPPSC और अन्य राज्य स्तरीय परीक्षाओं के लिए सटीक विश्लेषण और प्रमाणिक अध्ययन सामग्री तैयार करने के लिए जाने जाते हैं।